सु: मेरी क़िसमत में तू नहीं शायद
क्यों
तेरा इंतज़ार करता हूँ
मैं
तुझे कल भी प्यार करता था
मैं
तुझे अब भी प्यार करता हूँ
ल: आऽ
आज
समझी हूँ प्यार को शायद
आज
मैं तुझको प्यार करती हूँ
कल
मेरा इंतज़ार था तुझको
आज
मैं इंतज़ार करती हूँ
सु: मेरी क़िसमत में तू नहीं शायद
ल: आऽ
सु: सोचता हूँ कि मेरी आँखों ने
क्यूँ
सजाये थे प्यार के सपने
तुझसे
माँगी थी इक ख़ुशी मैंने
तूने
ग़म भी नहीं दिये अपने \-२
ज़िंदगी
बोझ बन गयी अब तो
अब
तो जीता हूँ और न मरता हूँ
मैं
तुझे कल भी प्यार करता था
मैं
तुझे अब भी प्यार करता हूँ
मेरी
क़िसमत में तू नहीं शायद
ल: आऽ
अब
न टूटें ये प्यार के रिश्ते \-२
अब
ये रिश्ते सम्भालने होंगे
मेरी
राहों से तुझको कल की तरह
दुख
के काँटे निकालने होंगे \-२
मिल
न जायें ख़ुशी के रस्ते में
ग़म
की परछाइयों से डरती हूँ
कल
मेरा इंतज़ार था तुझको
आज
मैं इंतज़ार करती हूँ
आज
समझी हूँ प्यार को शायद
सु: दिल नहीं इख़्तियार में मेरे
जान
जायेगी प्यार में तेरे
ल: तुझसे मिलने की आस है आ जा
मेरी
दुनिया उदास है आ जा \-२
सु: प्यार शायद इसी को कहते हैं
हर
घड़ी बेक़रार रहता हूँ
ल: रात\-दिन तेरी याद
आती है
रात\-दिन
इंतज़ार करती हूँ
सु: मेरी क़िसमत में तू नहीं शायद
क्यों
तेरा इंतज़ार करता हूँ
ल: मैं तुझे प्यार प्यार करती हूँ
सु: मैं तुझे प्यार प्यार करता हूँ
ल: मैं तुझे प्यार प्यार करती हूँ
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