र \: दिल शाद था के फूल खिलेंगे बहार में
मारा
गया ग़रीब इसी ऐतबार में
ल \: मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता \-२
अगर
तूफ़ाँ नहीं आता किनारा मिल गया होता
र \: मुझे तेरी मोहब्बत ...
ल \: न था मंज़ूर
क़िस्मत को न थी मर्ज़ी बहारों की
( नहीं
तो इस गुलिस्ताँ में ) \-२ कमी थी क्या नज़ारों की
मेरी
नज़रों को भी कोई नज़ारा मिल गया होता
अगर
तूफ़ाँ नहीं ...
र \: मुझे तेरी मोहब्बत ...
र \: ख़ुशी से अपनी आँखों को मैं अश्क़ों से भिगो
लेता
( मेरे
बदले तू हँस लेती ) \-२ तेरे बदले मैं रो लेता
मुझे
ऐ काश तेरा दर्द सारा मिल गया होता
अगर
तूफ़ाँ नहीं ...
ल \: मुझे तेरी मोहब्बत ...
मिली
है चाँदनी जिनको ये उनकी अपनी क़िस्मत है
( मुझे
अपने मुक़द्दर से ) \-२ फ़क़त इतनी शिकायत है
मुझे
टूटा हुआ कोई सितारा मिल गया होता
अगर
तूफ़ाँ नहीं ...
र \: मुझे तेरी मोहब्बत ...
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