Sunday, June 19, 2016

लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

ल:       लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी \- (२)
म:       कौन है वो, अपनों में कभी, ऐसा कहीं होता है,
            ये तो बड़ा धोखा है
ल:       लूटे कोई ...

ल:       (यहीं पे कहीं है, मेरे मन का चोर
म:       नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ मरोड़ ) \- (२)
ल:       जाने दो, जैसे तुम प्यारे हो,
            वो भी मुझे प्यारा है, जीने का सहारा है
म:       देखो जी तुम्हारी यही बतियाँ मुझको हैं तड़पातीं
ल:       लूटे कोई ...

म:       (रोग मेरे जी का, मेरे दिल का चैन
ल:       साँवला सा मुखड़ा, उसपे कारे नैन ) \- (२)
म:       ऐसे को, रोके अब कौन भला,
            दिल से जो प्यारी है, सजनी हमारी है
ल:       का करूँ मैं बिन उसके रह भी नहीं पाती
,म:   लूटे कोई ...




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