ल: लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी \- (२)
म: कौन है वो, अपनों
में कभी, ऐसा कहीं होता है,
ये
तो बड़ा धोखा है
ल: लूटे कोई ...
ल: (यहीं पे कहीं है, मेरे
मन का चोर
म: नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ मरोड़ ) \- (२)
ल: जाने दो, जैसे
तुम प्यारे हो,
वो
भी मुझे प्यारा है, जीने का सहारा है
म: देखो जी तुम्हारी यही बतियाँ मुझको हैं
तड़पातीं
ल: लूटे कोई ...
म: (रोग मेरे जी का, मेरे
दिल का चैन
ल: साँवला सा मुखड़ा, उसपे
कारे नैन ) \- (२)
म: ऐसे को, रोके
अब कौन भला,
दिल
से जो प्यारी है, सजनी हमारी है
ल: का करूँ मैं बिन उसके रह भी नहीं पाती
ल,म: लूटे कोई ...
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